रविवार, 28 जून 2009

बरस गयी बरस गयी रे बदरिया ,

बरस गयी बरस गयी रे बदरिया ,कमरे माँ बैठब ऐसै ही रहा मुहाल,बिजुरी जाय के बाद कै तौ पूछौ न हाल,पंखौ गरम-गरम भपका मारे ड्रैगन के नाय ||खुला कम्प्यूटर जो वोल्टेज लायी बिजुरिया,चलै लाग की-बोरड पै फटाफट अंगुरिया ,काओ लिखी सोचत बैठा रहेन खुजात खोपडिया,फिर सोचेन लिखडाली इक पाती मा हाल गुजरिया||बडन रामजुहार लिखेन,गेदाहरन दुलार लिखेन,गरमी मा गेदाहरन संग मैइके बैठी उनका......?लिखेन,मुस्तफा भाईयो गुज़र गए,मनी गए जयराम गए ,जाने...
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