
कनक भवन
बहुत अगोरेन तबै इयु दुसरकनी पोस्ट लिखै खातिर मज़बूर हुई गयेन ! का बाबू साहेब स्व० राम चंदर सिंह माया -बाज़ार ,फैजाबाद के बाद कोई एस नाही रह गए की ओकरे का ' आपन बोली भाखा से तनिकौ परेम होए ? चलो हम ई तो मान सकित है कि अवध कै इयु एरिया माँ गरीबी जियादा बाटे , पै हमनी का मालुम बाटे कि अवध परिछेतर कै बहुतै लोगे दूर-दूर तलक बहुतै उचै-उचै पदै पेया दूर परदेस मा हैइन और राम जी किरपा से सछमौ हैइन , का ऊ लोगन मा एक्कौ कै नजर हमार गोहार पै न पड़ी हुईहे ?
कोसिस तो करा ,ऐसेन लोगन का ढूढे का ,अउर उनके लेख ,विचार लिखाये कै भेजा ,भासा सुधारे कै ज़रुअत पडिहे तो ओहू कै परबनध किया जहीये || वैसे बाराबंकिहो,[पुरबी-दखिनी ] लकनौउहो [पुरबी ] प्रताप गढ़ [उत्तरी] भी चली | पंचन कै टिपनी केर इंतिजार मा आपे कै .......,.>