"हाय-बताऊँ "कहत कबीरा सुनो भाई साधो ,छोड़ कमंडल लकुटिया माला ,सुनो ध्यान लगाय जो रहा ''बताऊँ'',दरबारे अकबरी रहा बैठा -ठाला,मुग़ल-ए-आज़म चढ़ तख्त बैठल उदास ,भूला रहे सबै दरबारी लेहऊँ स्वास ,बस अकबरै भरें -रह निस्वास ,कहैं कहाँ हौ बीरबल जल्दी आवा पास,जल्दी आवा पास और नाही कौनो आस,वैद हकीम ज्ञानी ओझा गुनिया सबै हेराने,दरबार परवेसे बीरबल तभई,झुक-झुक किहिन हाकिम का अदब-जुहार ,अबहिन तक रहेओ कहां लगी डपट फटकार,लगी डपट फटकार ,फ़िर किहिन...
रविवार, 12 जुलाई 2009
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