रविवार, 12 जुलाई 2009

" सुनो ध्यान लगाय जो रहा ''बताऊँ "

"हाय-बताऊँ "


कहत कबीरा सुनो भाई साधो ,

छोड़ कमंडल लकुटिया माला ,

सुनो ध्यान लगाय जो रहा ''बताऊँ'',

दरबारे अकबरी रहा बैठा -ठाला,

मुग़ल--आज़म चढ़ तख्त बैठल उदास ,

भूला रहे सबै दरबारी लेहऊँ स्वास ,

बस अकबरै भरें -रह निस्वास ,

कहैं कहाँ हौ बीरबल जल्दी आवा पास,

जल्दी आवा पास और नाही कौनो आस,

वैद हकीम ज्ञानी ओझा गुनिया सबै हेराने,

दरबार परवेसे बीरबल तभई,

झुक-झुक किहिन हाकिम का अदब-जुहार ,

अबहिन तक रहेओ कहां लगी डपट फटकार,

लगी डपट फटकार ,फ़िर किहिन अदब-जुहार ,

बोले बीरबल हाल इह किहिस ''बताऊँ''हुजुर सरकार,

आज पालकी चढ़ हियाँ आयेन पहली बार ,

राहे दीन्ही लीन्ही कोऊ कै कई राम-जुहार ,

हमार पूछौ बस कैसन हाल रहा हुजुर सरकार ?

????

???

??

?

[अन्तराल : अंतराल : अंतराल ]
आगे पढ़ें...

रविवार, 28 जून 2009

बरस गयी बरस गयी रे बदरिया ,

बरस गयी बरस गयी रे बदरिया ,
कमरे माँ बैठब ऐसै ही रहा मुहाल,
बिजुरी जाय के बाद कै तौ पूछौ न हाल,
पंखौ गरम-गरम भपका मारे ड्रैगन के नाय ||
खुला कम्प्यूटर जो वोल्टेज लायी बिजुरिया,
चलै लाग की-बोरड पै फटाफट अंगुरिया ,
काओ लिखी सोचत बैठा रहेन खुजात खोपडिया,
फिर सोचेन लिखडाली इक पाती मा हाल गुजरिया||
बडन रामजुहार लिखेन,गेदाहरन दुलार लिखेन,
गरमी मा गेदाहरन संग मैइके बैठी उनका......?लिखेन,
मुस्तफा भाईयो गुज़र गए,मनी गए जयराम गए ,
जाने केकै बरी बा बचपन से पचपन तक कै साथी तमाम गए ||
मन उदास बा जल्दी आवा अचार कटहल भरवा-मिरचा लावा ,
तुहार हाल का बा ,गेहूं सरसों अच्छा-सस्ता पावा लदाय लावा ,
पैसा भेजाए देब घर कै घिउ जुगाड़ होए पाच किलो लेत आवा ,
कुछ होए या नहोए मन उदास बा तू जल्दी से जल्दी आवा ||
आगे पढ़ें...

शुक्रवार, 30 जनवरी 2009

" आपन जिल्ला फईजाबाद "

" गुरुद्वारा "ब्रह्मकुण्ड"
अबकी हम आपका फईजाबाद कै बारे मा कुछे औरो जनकरियो देत हई ....
जिल्ला फईजाबाद मा पांच ठो ' तहसील ' - सदर ,-बीकापुर ,- मिल्कीपुर ,-सोहावल , - रुदौली , औउर
गियारा[ग्यारा=११] बिलाक [विकास खण्ड]
- माया-बाज़ार, - पूरा-बाज़ार ,-तारून, - हरन्ग्टीन गंज ,-मिल्कीपुर ,-बीकापुर, -मसौधा, -सोहावल, -अमानीगंज [खंडासा], १०- रुदौली, ११- मवई , बाटे
लखनौउ बिधानसभा के नईकी हदबंदी [परिसीमन] मा जिल्ला फईज़ाबाद पांच एमेले सीट मा बटिबा
; निचुआ देखा लिस्ट बनी बाटी ::---
क्रमांकनाम-विधानसभा[वि०स०]वि०स०पहचान-नंबरकुलमरद-वोटर[म०वो०] कुल मेहरारू-वोटर[मे०वो०]कुलै के जोड़[वि०स०में कुलैवो०]
1रुदौली२७११४२३१८१२५६८४२६८००२
2.मिल्कीपुर[सुरक्षितअ०जाति]
२७३
१५९७२४१४१४३३०११५४
3.बीकापुर२७४ १६६९७११४७०३८३१४००९
4.अयोध्या२७५१६५७७३१४००४३३०५८१६
5.गोसांईगंज२७६१७५०१३१५३५८४३२८५९७
6जिल्ला फईजाबाद के पांचौ वि०स०मा कुलैवोटरन कै जोड़ ८०९७९९७०७७७९१५१७५७८

ऊपर दिहिन सभै गिन्तिया आखिरी नाही बाटे एहमन बदलाव हुई सकत है
जिल्ला मा दुई ठो इनवरसिटी .- राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय ,जौन सहर के दक्खिन ,सहर से निकसते है , . दुसरकी, आचार्य नरेंदर देव किरसी विस्विदयालय ,सहर के दक्खिनै ४२ किलोमीटर दूर 'कुमारगंज' मा बाटे |
''पंचन का ऐसे जनकारी चिटठा ''अवध-प्रवास'' पै मिलत रहियै ''


आगे पढ़ें...

गुरुवार, 8 जनवरी 2009

' काहे दुखा पहुँचावत हौ ''


कनक भवन
बहुत अगोरेन तबै इयु दुसरकनी पोस्ट लिखै खातिर मज़बूर हुई गयेन ! का बाबू साहेब स्व० राम चंदर सिंह माया -बाज़ार ,फैजाबाद के बाद कोई एस नाही रह गए की ओकरे का ' आपन बोली भाखा से तनिकौ परेम होए ? चलो हम तो मान सकित है कि अवध कै इयु एरिया माँ गरीबी जियादा बाटे , पै हमनी का मालुम बाटे कि अवध परिछेतर कै बहुतै लोगे दूर-दूर तलक बहुतै उचै-उचै पदै पेया दूर परदेस मा हैइन और राम जी किरपा से सछमौ हैइन , का लोगन मा एक्कौ कै नजर हमार गोहार पै पड़ी हुईहे ?
कोसिस तो करा ,ऐसेन लोगन का ढूढे का ,अउर उनके लेख ,विचार लिखाये कै भेजा ,भासा सुधारे कै ज़रुअत पडिहे तो ओहू कै परबनध किया जहीये || वैसे बाराबंकिहो,[पुरबी-दखिनी ] लकनौउहो [पुरबी ] प्रताप गढ़ [उत्तरी] भी चली | पंचन कै टिपनी केर इंतिजार मा आपे कै .......,.>
आगे पढ़ें...

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

" मैं अयोध्या ::फैजाबाद "

__राम की पैड़ी

[श्री]
मैं अवध-प्रवाह यानि अयोध्या बोल रहा हूँ यह नाम जो अब 'भारत के वास्तविक इतिहास ' अर्थात " "पुराणों" का हिस्सा है | आज आधुनिक इतिहास में मैं जनपद " फैजाबाद' के मुख्य नगर का जुड़वां नगर हूँ | मुझे आज भी अयोध्या ही कहा जाता है | मैंने दशरथ का युग देखा है :
अब इहाँ से आगै हम अपने बारे माँ अपनी भाखा:अवधी: माँ आपन कथा कहब |
जीहाँ ई वही दसरथ राम भरत ,लखन ,शत्रुहन के बाप [दादा] रहीं |

पहिले इ एरिया केर बारे मा जानब जरूरी है | ई जिला फैईजाबाद के सहर जेके नामौ फैईजाबाद है , ई सहर लखनऊ जौन उतर परदेश के राजधानी हैई उसे १३० किलोमीटर पूरब बा ,पहिलैइमा आज कै अम्बेडकर नगरौ अकबर पुर कै नाम से मिला रहा १९९५ मा ओकरा तब कै मुख मनतरी माया वती जिला फैईजाबाद से काट कै नवा जिला बनाये दिहिन ,उकरे बदले मां बाराबंकी कै रुदौली तहसील का एमा जोड़ दिहिन 'गदा लैईके झुनझुना थमाए दिहिन ; खैर ईसब तो राजनीत के खेला बा | जिला फैईजाबाद कमिसनारियो बा |

सहर फैईज़बाद का बंगाल कै नवाब अलीवर्दी खां {१६७६-१७५६} बसाइन रहा असल मां अवध कै दूसर नवाब ईसवी संवत १७३० मा सादात खां एका बसाइन रहा ; एसे पहिले इहाँ के सहर तीरथ-राज अजोधा [अयोध्या] रहा ,अब अजुधा सहर [शहर ] फैईज़ाबाद से छः किलो मीटर पूरब उतर पड़त है

आगे पढ़ें...

Taja3comment

Followers

 

Copyright © 2009 by अवध-प्रवास::[|फैजाबाद|]