गुरुवार, 8 जनवरी 2009

' काहे दुखा पहुँचावत हौ ''


कनक भवन
बहुत अगोरेन तबै इयु दुसरकनी पोस्ट लिखै खातिर मज़बूर हुई गयेन ! का बाबू साहेब स्व० राम चंदर सिंह माया -बाज़ार ,फैजाबाद के बाद कोई एस नाही रह गए की ओकरे का ' आपन बोली भाखा से तनिकौ परेम होए ? चलो हम तो मान सकित है कि अवध कै इयु एरिया माँ गरीबी जियादा बाटे , पै हमनी का मालुम बाटे कि अवध परिछेतर कै बहुतै लोगे दूर-दूर तलक बहुतै उचै-उचै पदै पेया दूर परदेस मा हैइन और राम जी किरपा से सछमौ हैइन , का लोगन मा एक्कौ कै नजर हमार गोहार पै पड़ी हुईहे ?
कोसिस तो करा ,ऐसेन लोगन का ढूढे का ,अउर उनके लेख ,विचार लिखाये कै भेजा ,भासा सुधारे कै ज़रुअत पडिहे तो ओहू कै परबनध किया जहीये || वैसे बाराबंकिहो,[पुरबी-दखिनी ] लकनौउहो [पुरबी ] प्रताप गढ़ [उत्तरी] भी चली | पंचन कै टिपनी केर इंतिजार मा आपे कै .......,.>

Comments :

5 टिप्पणियाँ to “' काहे दुखा पहुँचावत हौ ''”

''ANYONAASTI '' ने कहा…
on 

पँचन से छमा मांगीत है , भयो [अनुज वधू ] के बीमारी के कारन चिट्ठावा पै धियान नाही दै पाइथ है

रौशन ने कहा…
on 

कौनौ भाई/बहिनी लोगन के अगर अवधी में लिखय में परशानी होत होय तो कौनौ बात नाही आप जयिसे लिखब असान पावें लिखयं बस तनकी उत्साह बढ़त रहे कि केहू कौनौ पढ़तौ बा

creativekona ने कहा…
on 

भइया अनुराग ,
यू बहुत नीक किह्यो की अपनी बोली मा बिलाग शुरू कई दीन्यौ.
हम तौ सोचते रहे की कौनौ तौ आवै आगे ,तौन तुम बाजी मारि
लई गयो .हमरौ बधाई लई ल्यौ.
हेमंत कुमार

Suman ने कहा…
on 

nice

RAJ SINH ने कहा…
on 

सब पंचन का जैराम जी की. अब अपने खेत्ता क बोली भाखा माँ बोलै बत्लाइ बतकही क मज़ा औरै होए . भैया फ़िलहाल ता हाजिरी लगाई देहे .आगे पीछे घूम घाम रचि के आनंदौ पाए.रास्ताऊ देख लेहे बाटी अवुर भैकरन क न्योतवु मिल गा बा .अब घूम फिर पहुन्च्तौ रहब . सभन बन्धुं जनन का अहसान की प्रेम से न्योता देहेन अपने घरे बोलायेन .

फिर सब भैकरन क आभार.

 

Copyright © 2009 by अवध-प्रवास::[|फैजाबाद|]